Tuesday, 22 July 2025

जगदीप धनकड़ (पूर्व उप राष्ट्रपति)

 जगदीप धनखड़ का साधारण किसान से उप राष्ट्रपति तक का सफर - 
           जगदीप धनखड़
सामान्य परिचय - 

सियासी सफर - 
साधारण किसान परिवार से उपराष्ट्रपति तक का सफर - 
जन्म 18 मई 1951 
जन्म स्थान - किठाना, झुंझुनू राजस्थान
परिवार की आर्थिक स्थिति -  साधारण किसान परिवार
जाति - जाट
पिता - गोकुल चंद
माता - केसरी देवी
विवाह - सुदेश धनखड़ (1979)
संतान - 
 पत्नी व बेटी के साथ जगदीप धनखड़ 
1. दीपक (पुत्र) (ब्रेन हेमरेज के कारण 14 वर्ष की आयु में दिल्ली में निधन)
2. कामना (पुत्री) पहले मेयो कॉलेज अजमेर, फिर बीवर कॉलेज अमेरिका से अध्ययन। इसके बाद कामना समर कोर्सेस के लिए इंग्लैंड,इटली और ऑस्ट्रेलिया तक में पढ़ाई कर चुकी हैं। कामना ने दिल्ली स्थित इटली दूतावास में इटैलियन भाषा भी सीखी।
पद - 
1. वकील 1981 से 1989
2. सासंद एवं मंत्री नौ वीं लोकसभा झुंझुनू लोकसभा सीट से जनता दल 
02 दिसंबर 1989 से 21 जून 1991 (प्रधानमंत्री विश्व नाथ प्रताप सिंह)
3. 21 नवंबर 1990 से 21 जून 1991 संसदीय कार्य मंत्री (प्रधानमंत्री चंद्रशेखर)
4. विधायक किशनगढ़ राजस्थान से कांग्रेस पार्टी से 04 दिसंबर 1993 से 29 नवंबर 1998 (जगत सिंह, भाजपा को हराया) 
5. 30वें राज्यपाल पश्चिम बंगाल (केसरी नाथ त्रिपाठी के स्थान पर 30 जुलाई 2019 से 18 जुलाई 2022
6. उप राष्ट्रपति एवं सभापति राज्य सभा  11 अगस्त 2022 से 22 जुलाई 2025 तक।

शिक्षा - 
1. प्रारंभिक शिक्षा गांव के स्कूल से।
2. स्कॉलरशिप पर चित्तौड़गढ़ सैनिक स्कूल से माध्यमिक शिक्षा।
3.धनखड़ का चयन नेशनल डिफेंस अकादमी होने के बावजूद उन्होंने जयपुर के महाराजा कॉलेज से फिजिक्स में बीएससी (ऑनर्स) की डिग्री और 
साल 1978 में उन्होंने जयपुर विश्वविद्यालय में एलएलबी कोर्स में एडमिशन लिया।
4. वर्ष 1978 में राजस्थान यूनिवर्सिटी में प्रवेश ले कर 1981 में कानून (LLB) की पढ़ाई पूरी की।
केरियर - 
उन्होंने जयपुर में वकालत शुरू की और थोड़े से दिनों में वर्ष 1990 से वो राजस्थान हाई कोर्ट के प्रमुख वकीलों में शामिल हो गए। इसी समय जाटों को OBC में शामिल करने हेतु आंदोलन चल रहा था। धनखड़ ने इस आंदोलन में बढ़- चढ़ कर भाग लिया। सुर्खियों में रहने के कारण जाट नेताओं में सब से प्रभावशाली चौधरी देवीलाल से निकटता बढ़ी।
चौधरी देवीलाल से निकटता - 
चौधरी देवीलाल की प्रेरणा से जगदीप धनखड़ राजनीति में आए। देवीलाल की अंगुली पकड़ कर आगे बढ़ते धनखड़ को वर्ष 1989 के आम चुनाव से पहले उनके 75वें जन्मदिन पर 75 गाड़ियों का काफिला लेकर दिल्ली पहुंचने और निकटता के कारण वी.पी. सिंह ने जनता दल से झुंझुनू लोक सभा से टिकट दे कर सांसद बनाया। वी.पी. सिंह सरकार में देवीलाल उप प्रधानमंत्री बने और धनखड़ केंद्र में मंत्री।
दल - बदलू जगदीप धनखड़ - 
राजनीतिक केरियर बनाने के लिए जगदीप धनखड़ ने कई पार्टीयां बदली। उन्होंने राजनीतिक जीवन में जनता दल,(1989 से 1991नौ वीं लोकसभा, निकटतम प्रतिद्वंदी कैप्टन अयुब खान नुआ झुंझुनू, कांग्रेस), कांग्रेस (1991 से2003) और फिर भाजपा में रह कर आगे बढ़े। 
वर्ष 1989 से 1991 तक वह जनता दल के सांसद रहे। इसके देवीलाल को अंगूठा दिखा कर वर्ष 1991 में कांग्रेस में शामिल हो कर अजमेर लोकसभा सीट से सांसद का चुनाव लड़ा, हार गए। कांग्रेस से किशनगढ़ राजस्थान विधानसभा सीट से विधायक बने। कांग्रेस से ही 1998 में झुंझुनू से लोकसभा चुनाव लड़ा, तीसरे स्थान पर रहे। 2003 में धनखड़ ने चूरू सांसद रामसिंह कसवां की निकटता से भाजपा में पदार्पण किया। वर्ष 2008 के विधानसभा चुनाव में भाजपा प्रचार समिति में शामिल हुए।
उप राष्ट्रपति बनने से पहले - 
30 जुलाई 2019 को, राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने उन्हें पश्चिम बंगाल का राज्यपाल नियुक्त किया। 16 जुलाई 2022 को भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने उन्हें भारत के उपराष्ट्रपति के 2022 के चुनाव के लिए अपना प्रत्याशी घोषित किया।[ राज्यपाल थे, जो सख्त रुख और अनुशासन प्रिय कार्यशैली एवं पक्षपात के आरोपों के दम पर चर्चा में रहे।
क्यों हैं चर्चा में - 
जगदीप धनखड़ का राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू को लिखा गया पत्र ☝️
भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सोमवार (21 जुलाई 2025) को मानसून सत्र के दूसरे दिन, पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भेजे पत्र में खराब स्वास्थ्य और चिकित्सकीय सलाह का हवाला देते हुए संविधान के अनुच्छेद 67(a) के तहत इस्तीफा दिया। इस्तीफे में उन्होंने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उपराष्ट्रपति रहते हुए उन्हें जो सम्मान, विश्वास और स्नेह मिला, वह जीवनभर उनके दिल में संचित रहेगा।
कब क्या हुआ - 
जगदीप धनखड़ ने 11 अगस्त 2022 को भारत के 14वें उप राष्ट्रपति की शपथ ली और 21 जुलाई 2025 को इस्तीफा दे दिया। अपना कार्यकाल पूरा नहीं करने वाले तीसरे उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ से पहले, उप राष्ट्रपति कृष्ण कांत का कार्यकाल 27 जुलाई 2002 को निधन के चलते बीच में समाप्त हो गया, और वराहगिरि वेंकट गिरि (वी.वी. गिरि) ने 1969 में राष्ट्रपति चुनाव लड़ने हेतु उप राष्ट्रपति पद से इस्तीफा दिया।
उप राष्ट्रपति चुनाव में भारी मतों से जीते थे धनखड़ -
जगदीप धनखड़ ने 6 अगस्त 2022 को उप राष्ट्रपति पद की शपथ ली, उन्होंने विपक्षी उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा को 725 में से 528 वोट ले कर हराया था। उन्हें 725 में से 528 वोट ले कर 348 मतों से पराजित किया। अल्वा को 182 वोट प्राप्त हुए।
अफवाहें - 
धनखड़ की इन दिनों पार्टी में ज्यादा नहीं चल रही है। एक सभा में उनके द्वारा दिए गए भाषण को भी इस्तीफे का कारण माना जा रहा है। कहा जा रहा है चलते सदन में संसदीय कार्य मंत्री राज्य सभा में जगदप्रकाश नड्डा ने (No thing going on record) शब्दों से उप राष्ट्रपति एवं सभापति काफी आहत थे, आखिरकार शेड्यूल बीच में छोड़ते हुए इस्तीफा राष्ट्रपति को भेज दिया। जगदीप धनखड़ का सरकार के विरुद्ध भाषण
विवादिद व्यक्तित्व - 
उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का राजनीतिक जीवन न केवल उपलब्धियों बल्कि कुछ विवादों और टकरावों के कारण भी चर्चा में रहा है। विशेष रूप से राजस्थान, पश्चिम बंगाल और राष्ट्रीय राजनीति में उनके रवैए को लेकर कई बार उनकी आलोचना हुई।
🔥1.पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में विवाद - मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्यपाल धनखड़ के बीच लगातार टकराव रहा। उन्होंने बार-बार राज्य सरकार पर कानून-व्यवस्था की विफलता, अल्पसंख्यकों की सुरक्षा में चूक, और प्रशासनिक भ्रष्टाचार के आरोप लगाए।
ट्विटर और प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से राज्य सरकार की आलोचना करते रहे, जिससे संविधान में राज्यपाल की मर्यादा को लेकर बहस छिड़ गई।
विशेष घटनाएं - 
A. NRC/CAA विरोधी आंदोलन के समय उन्होंने छात्रों और विश्वविद्यालयों के रवैये की आलोचना की।
B. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2021 के बाद हिंसा को लेकर केंद्र को रिपोर्ट भेजी, जिससे टीएमसी ने आरोप लगाया कि वे “भाजपा के एजेंट” के रूप में काम कर रहे हैं।
C. विधानसभा अध्यक्ष बिमान बनर्जी से भी तीखी बहसें हुईं; कुछ विधायकों के शपथ ग्रहण को रोके जाने पर विवाद हुआ।
🔥 2.भाजपा से जुड़ाव और निष्पक्षता पर सवाल - भले ही वे राज्यपाल पद पर थे, परन्तु विपक्षी दलों ने बार-बार उन पर आरोप लगाया कि वे भाजपा की नीतियों और नेताओं का पक्ष लेते हैं। वर्ष 2022 में जब वे एनडीए के उप राष्ट्रपति उम्मीदवार बने, तब यह बात और पुष्ट हुई कि उन्होंने राज्यपाल रहते हुए भी भाजपा के साथ "निकटता" बनाए रखी।
🔥 3. राज्यसभा सभापति के रूप में विपक्ष से टकराव - राज्यसभा सभापति के रूप में उन्होंने कुछ ऐसे निर्णय दिए जिन पर विपक्ष ने आपत्ति जताई।
उन्होंने संसदीय विशेषाधिकार और न्यायिक समीक्षा के अधिकार को लेकर बयान दिया, जिससे न्यायपालिका और विधायिका के बीच भूमिका को लेकर बहस छिड़ी। लोक सभा में राहुल गांधी के बोलने से पहले उनके स्पीकर का स्विच ऑफ करना, एक साथ कई राज्य सभा सांसदों का निलंबन एवं अन्य।
उन्होंने कहा था “संसद की संप्रभुता न्यायपालिका से ऊपर है”, जिस पर सुप्रीम कोर्ट के कुछ सेवानिवृत्त न्यायाधीशों और संविधान विशेषज्ञों ने चिंता जताई।"
🔥 4. जाट आरक्षण आंदोलन में भूमिका (राजस्थान) - वे जाट समुदाय से हैं और जाटों को OBC आरक्षण दिलाने के आंदोलन में सक्रिय रहे। इस मुद्दे पर उन्होंने कई बार राजनीति की मुख्यधारा से अलग भी बयान दिए, जिससे विवाद और असहमति उत्पन्न हुई।
🔥 5. राजनीतिक दलों में बदलाव (दल बदलू) - उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत जनता दल से की थी, फिर कांग्रेस, फिर जनता दल (यू) और अंत में भाजपा से जुड़ गए। ये बार-बार दल परिवर्तन भी उनकी राजनीतिक निष्ठा पर प्रश्नचिह्न खड़े करते रहे हैं।
✍️ निष्कर्ष:
जगदीप धनखड़ एक प्रखर एवं आक्रामक नेता रहे हैं, आलोचक उन्हें संविधानिक मर्यादाओं का उल्लंघनकर्ता मानते हैं।
"भगोड़ागिरी इनकी पुरानी आदत है। बचपन में स्कूल और बुढ़ापे में देश छोड़कर भाग जाते हैं।' कन्हैया के इस बयान को जगदीप धनखड़ और संघ से जोड़कर देखा जा रहा है।" - कन्हैया कुमार कांग्रेस का बयान।
"जगदीप धनखड़ राज्यपाल के स्थान पर भाजपा कार्यकर्ता के रूप में काम कर रहे हैं।" - ममता बनर्जी मुख्यमंत्री पश्चिम बंगाल 
"इन लोकसभा चुनावों में भाजपा जगदीप धनखड़ को स्टार प्रचारक के रूप में काम ले रही है।" - 2024 के लोकसभा चुनावों में अप राष्ट्रपति होने के बावजूद बार - बार दौरे पर तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का बयान।

प्रधानमंत्री के सामने उच्च पद पर होते हुए झुकते हुए जगदीप धनखड़।
दिनांक 23.07.2025☝️
स्त्रोत - 
1. first इंडिया न्यूज
2. मीडिया रिपोर्ट्स

लेखन - शमशेर भालू खां सहजूसर 
(जिगर चूरूवी)

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