Wednesday, 24 November 2021

अख्तर खान अकेला कोटा की कलम

शमशेरभालु खान गांधी

भाई शमशेर खान भालू उर्फ़ गाँधी को सियासत विरासत में मिली, लेकिन वोह सियासत जोड़तोड़ ,मौक़ापरस्ती, उर्दू ज़ुबान,मदरसों की उपेक्षा की नहीं उनकी परवरिश गांधीवादी माहौल में रही। एक ईमानदाराना गांधी वादी संघर्ष में रही और यही वजह है के आज वोह उर्दू ,मदरसों के लिए, एक संघर्ष ,एक आवाज़ बनकर उभरे है।
अल्लाह से दुआ है कि इस लड़ाई को कामयाब करे।
उनके उठाये हुए मुद्दों के अलावा भी जो मुद्दे वो भूल गए है ,उन पर संयुक्त विचार कर ,जल्द ही,गाँधीवादी विचारधारा को पुनर्जीवित करने के लिए , ईमानदाराना फैसले भी ले , उन्हें तुरंत लागू भी करे।
राजस्थान में उर्दू ,उर्दू से जुड़े  लोगों के हक़, इन्साफ के लिए,उर्दू तहज़ीब के दायरे में खुद को तकलीफ देकर गाँधीवादी मुख्यमंत्री के राजस्थान में गांधीवादी तरीके से आंदोलन कर रहे भाई शमशेर खान भालू को दिल से सलाम सेल्यूट।
सेल्यूट इसलिए के अब तक जो भी तंज़ीमें जो भी तहरीकें जो भी संगठन आंदोलन के लिए आये वोह सिमट कर चले भी गये लेकिन उर्दू तहज़ीब के साथ बलात्कार कहो या फिर कहो पक्षपात या फिर कहो ज़ुल्म ज़्यादती वादा खिलाफी सब होते रहे और आंदोलन ठंडे बसते में जाते रहे ।
मैं खुद शमेशर खान भालू के पहले आन्दोलन के वक़्त अचानक आंदोलन खत्म करने के खिलाफ था में शमेशर खान भालू के इस तरह से बिना मुख्यमंत्री के साथ वार्ता में शामिल हुए सिर्फ वायदे के आधार पर चाहे वोह टूटी फूटी भाषा में लिखित में रहा हो,आन्दोलन खत्म करने के खिलाफ था मेने सबसे पहले शमशेर खान भालू के खिलाफ मोर्चा खोला था।
उनकी उनके समर्थकों की खुली आलोचना की थी क्योंकि अब तक के मेरे अनुभव में हमारे उर्दू , उर्दू तहज़ीब उर्दू को  जानने मानने वालों के साथ यही सब कुछ होता रहा है।
इंसाफ के परचम को बुलंद करने वाले लोगों को या तो धमकाया जाता है या खरीदा जाता है या प्रलोभन दिया जाता है वोटों का वास्ता दिया जाता है और बस एक ड्रामा होता है और आंदोलन खत्म हो जाता है।
उस वक़्त भी मेरे अनुभव के आधार पर मेरे ज़हन में वही पुरानी तस्वीरें थी और मेरे दिल दिमाग में शमशेर भाई भालू के यूँ पीक पर पहुंचने के बाद आंदोलन खत्म करने के खिलाफ गुस्सा था लेकिन वाह शमशेर भाई सेल्यूट है तुम्हे तुम्हारी ईमानदारी ईमानदाराना संघर्ष को जिसे फिर से तुमने बिना किसी लोभ लालच प्रलोभन के टारगेट के साथ खड़ा कर दिया ।
पीछ लग्गू हों या फिर हमारे और सरकार के बीच के डीलर उनकी ज़ुबान पर चाहे ताले लगे हों लेकिन मजबूरी में उन्हें समर्थन का पत्र मुख्यमंत्री साहिब के नाम लिखना पढ़ रहा है।
वह पत्र मुख्यमंत्री महोदय के पास पहुंचे ना पहुंचे  लेकिन यह लोग ,खुद की खीज मिटाने  खुद को पारसा साबित करने हमारे साथ हमारी  उर्दू हमारी तहज़ीब हमारे दस हज़ार से भी ज़्यादा मदरसा परिवारों के साथ बताने की कोशिश में इनके  लिखे गए पत्र को खुद के सोशल मीडिया एकाउंट पर सार्वजनिक कर रहे है कुछ ऐसे भी है जो उर्दू तहज़ीब के अलमबरदारों से जुड़े सभी लोगों के पुरे हिंदुस्तान के ज़िम्मेदार है लेकिन वोह राजस्थान में आये उन्होंने मुख्यमंत्री महोदय से मुलाक़ात की, इस मामले में कोई बात नहीं की जब दबाव बना तो, राहुल गाँधी ,सोनिया गांधी, अजय माकन से इस मामले में बात करने की सोशल मीडिया प्रचार जारी किया।
खेर एक तरफ सियासत है एक तरफ उर्दू के दुश्मन एक तरफ उर्दू तहज़ीब को मानने वाले समाज को गुमराह कर ठगने वाले है उनसे नफरत करने वाले है उनसे दोहरा व्यवहार करने वाले है उनकी उपेक्षा करने वाले है तो दूसरी तरफ कुछ तंज़ीमों के साथ अब खुद अकेले शमशेर खान ।
कड़ाके की सर्दी  ठिठुरती ठंड बरसते पानी में उर्दू,मदरसा पैराटीचर्स ,मदरसों, के संघर्ष के लिए ज़िंदाबाद होकर खड़े है।
यक़ीनन उन्हें प्रलोभन दिए होंगे यक़ीनन उन्हें धमकियां दी होंगी लेकिन वो अपनी मांग जो वाजिब भी है और हक़ भी है उसके पूरे होने तक खड़े है अल्लाह उन्हें जल्दी कामयाबी दे।
 फिर से कोई दलाल फिर से कोई गुमराह करने वाला भीतरघाती हमारे अपनों में से गद्दार कामयाब ना हो जाए यही दुआ है ,,शमशेर भालू ने आज से एक साल पहले , मुझे फोन करके उर्दू पैराटीचर्स ,मदरसों को इंसाफ दिलाने के लिए मुख्यमंत्री को पत्र लिखने के लिए विनम्र गाँधीवादी तहज़ीब से गुज़ारिश की थी। 
मेने नईमुद्दीन गुड्डू साहब व पंकज मेहता सहित कुछ प्रतिनिधियों से पत्र भी लिखवाये उस वक़्त और दूसरों की तरह कुछ क़दम आगे चलकर चुप बैठ जाने वालों में से में इन्हे भी वैसा ही एक समझने की गुस्ताखी कर रहा था।
में समझ रहा था के तहरीक ऐ उर्दू राजस्थान की जो हवा है जो कोशिशें है स्टाफिंग पैटर्न का जो दबाव है उसे खत्म करने के लिए यह एक नया कुछ बिचलियों का पैतरा है।
लेकिन में गलत था मुझे अफ़सोस है कि मेने ठाकुर शमशेर खान भालू गांधी को गलत समझा था लेकिन शाबाश शमेशर भाई तुम तो सो तक हीरा निकले मुजाहिद निकले तुम जो कहा वोह करने वाले निकले तुम ईमानदाराना आंदोलन मामले में चौबीस कैरेट सोना साबित हुए।
में सार्जनिक रूप से तात्कालिक माहौल में जो सोच मेरी नेगेटिव बनी थी उसके लिए दिल से तहे दिल से झुक कर माफ़ी मांगता हूँ आपको सलाम करता हूँ  व अल्लाह से दुआ है कि शमशेर भाई का यह आंदोलन जल्दी से जल्दी कामयाब हो।
अब तो दिल में बगावत होती है ,के जो होगा देखा जाएगा हम भी शमशेर साहब के साथ पार्टी का झोली झंडा छोड़कर तय्यार हो जाएँ और हम इसके लिए , शाना बा शाना मिलाकर आखरी दम तक किसी भी तरह की क़ीमत चुका कर भी संघर्ष के लिए तय्यार हैं।
ज़रा सोचो गरीबों के हमदर्द रहे जांबाज़ संघर्ष शील सिपाही चूरू के पूर्व विधायक स्वर्गीय भालू खान के सुपुत्र जिनके पास नौकरी है ऐशो आराम के साधन है  वोह एक लंगोटी के सहारे , एक गांधीवादी टोपी के सहारे सिद्धांतों के तहत गाँधीवादी विचार के साथ क्यों संघर्ष कर रहे है।
वायदा खिलाफी के बाद तो आक्रोश होना चाहिए लेकिन वोह वायदा याद दिलाने के लिए वही उर्दू की तहज़ीब वही मोहब्बत का इस्लामिक पैगाम और अपने हक़ संघर्ष के लिए वही इंसाफ के तरीके से ईमानदाराना जंग लड़ रहे है।
तेज़ धुप में ठिठुरती ठंड में बरसात में सर्दी में यह शमशेर भाई मेरी इस तहज़ीब उर्दू के लिए अनशन पर बैठे है।
शमशेर भाई जो ठाकुर भी है भालू भी है खान भी हैं जिनकी विरासत में ईमानदाराना सियासत भी है जो उर्दू के गुरु जी भी है ,और इन  शमेशर की शमशीर बेटी पढ़ाओ-बेटी बचाओ के साथ साथ ज़ालिम ,नाइंसाफी के खिलाफ गाँधीवादी भी है। 18 अप्रेल 1975 में जन्में इस लाल ने सियासत की विरासत को घुड़की दी हालातों की वजह से वोह सिर्फ दलित पीड़ित शोषित निर्धन लोगों में शैक्षणिक जागरूकता उनके साथ हो रही ना इंसाफ़ी के खिलाफ संघर्ष की आवाज़ बनकर रहे।
 ,, उन्होंने एकसंघर्षशील युवा नेतृत्व की तरह , ईमानदारी से छात्रों के लिए संघर्ष किया, और प्रतिभावान छात्र की तरह अध्ययन भी किया यही वजह रही के, भाई शमशेर खान भालू को,2005 में उर्दू विषय में , सर्वाधिक अंक लाने पर ,गोल्ड मेडल के साथ बेहिसाब पुरस्कारों से नवाज़ा गया भाई शमशेर की परवरिश उनके वालिद मरहूम भालू खान के विधायक कार्यकाल और सियासी व्यवस्थाओं में हुई उन्होंने गाँधीवादी सियासत उन्ही से सीखी उनकी माँ सलामन बानो ने उन्हें भटके हुए लोगों को राह पर लाना ईमानदारी से पीड़ित लोगों के इंसाफ के लिए संघर्ष करना सिखाया , जबकि 20 अक्टूबर 1996 को  उनका निकाह बहन सदफ शमशेर गांधी से होने के बाद वोह उनकी शरीक ऐ हयात के साथ साथ ज़िंदगी की मार्गदर्शक बनीं।
उन्होंने भी भाई शमशेर का हर संघर्ष में कंधे से कंधा मिलाकर साथ दिया भाई शमशेर की बिटिया अंजलि खान वकील बनकर इन्साफ की जंग में शामिल है जबकि रोज़ा खान व प्रेरणा खान अपने पिता दादा श्री के पद चिन्हों पर है। भाई शमशेर खान अपना जीवन अपना भविष्य दांव पर लगाकर सिर्फ  उर्दू तहज़ीब उर्दू जुबान उर्दू के हमदर्दों मदरसों पैराटीचर्स उस्तादों के लिए संघर्ष कर रहे है अनशन कर रहे है।
 उनकी सियासी चाहत नहीं अब वक़्त आ गया है उनके इस संघर्ष के बाद हमारे अपने वोटों से चुने नेताओं ने जब मांगों के समर्थन में दिखावे के तोर पर पत्र लिखना शुरू किये है सोशल मीडिया पर हमदर्दाना दिखावे की शुरुआत की है तो फिर हमें भी एकजुट होकर इस मामले में रोज़मर्रा एक पत्र मुख्यमंत्री को मुख्य सचिव को लिखने का अभियान चलाना चाहिए।
हर ज़िले हर कस्बे हर शहर में जिला कलेक्टर,उपखण्ड,अधिकारी तहसील स्तर पर  अब इस आवाज़ के हक़ में संघर्ष की आवाज़ अलग-अलग टोलियां बनाकर बुलंद करना चाहिए।
अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

साथी ओमप्रकाश वर्मा की कलम

प्रिय शमशेर भालू खान भाईसाहब।
कड़ाके की सर्दी पड़ने वाली है। घर लौट आओ। वैसे भी आपकी खुद की नौकरी तो परमानेंट भी है और अच्छी तनख्वाह भी। बेटी अंजली खान भी एलएलबी पूरी कर अब वकालत शुरू करने वाली है। अपना पूरा परिवार आपके संघर्ष से गौरवान्वित तो है, किंतु अपने मुखिया को 34 दिनों से नंगे बदन अनशन पर देखकर थोड़ा दुःखी भी है। वैसे भी अंधी बहरी भैंस के आगे ये हल्की सी बीन कब तक बजाते रहोगे।

आपका सबसे बड़ा दुर्भाग्य यह है कि आप उस कौम से ताल्लुक रखते हैं जिसमे उसके धार्मिक प्रतीकों से लेकर नये नवेले अवतार एआईएमआईएम के ओवैसी तक के सम्मान पर यदि हल्की सी चोट हो जाए तो नारों और आंदोलनों से देश की सड़कें भीड़ से पाट दी जाती हैं परंतु  जब बात संवैधानिक अधिकारों की आती है तो मानो सांप सा सूंघ जाता है। आप उस कौम को जगाने का प्रयास कर रहे हैं जिसमे जागने के बाद फ़ज्र की नमाज की तो चिंता होती है परंतु फर्ज की अदायगी की बात होते ही वापिस उबासी आने लगती है। 

इससे भी बड़ा दुर्भाग्य यह है कि जिस तरह आपका और हमारा समाज बिना शर्त, बिना लाग लपेट के कांग्रेस से स्थायी रूप से जुड़ चुका है, अब उसे अलग करना लगभग असंभव है। मारे, कूटे, लूटे, पीटे चाहे एक कोने में सड़ने के लिए पटक दिया जाए परंतु ज्यों ही चुनाव की घोषणा होगी , त्यों ही सबसे पहले गलबहियां डाल कर जय भीम जय मीम का उद्घोष लगा कर कांग्रेस के दामन से आंसू पोंछने सबसे पहले हम ही आएंगे। कांग्रेस से बिना शर्त, बिना मांग का यह जन्मजात मोह ही हमारी बर्बादी का सबसे बड़ा कारण है। कांग्रेस की छाती पर 35 दिन का आपका अनशन भी मंत्रिमंडल विस्तार की खुशी के पटाखों को रोक नहीं पाया।

उर्दू संविदाकर्मियों को स्थायी करने से अन्य संविदाकर्मियों के स्थायी करण की राह खुलेगी। उर्दू के सम्मान की बहाली के साथ ही राजस्थानी भाषा को मान्यता के संघर्ष को भी दिशा मिलेगी। कांग्रेस की बेरुखी असंख्य मुस्लिम युवाओं को प्रगतिशील सोच एवं परिवर्तन की और उन्मुख करेगी। आपका संघर्ष बहुसंख्यक आबादी के लिए एक मिसाल बन पाएगा। परंतु संघर्ष की यह राह कितनी आसान है, ये आप ख़ुद जान चुके हैं। 

आपका संघर्ष और रुंधे गले से निकलती गरजदार आवाज यह भी तय कर देगी कि कांग्रेस को कैसे मुसलमान और दलित पसंद हैं?? संघर्षशील, गर्जना युक्त, अधिकारों के लिए जागरूक और पढ़े लिखे लोग या फिर चुपचाप मन मसोस कर रह जाने वाले और चुनाव के समय फिर से कांग्रेस के पल्लु में बेवजह छुप जाने वाले लोग?? आपका अनशन और धरना , संविदाकर्मियों के स्थायीकरण और उर्दू संघर्ष की नई ऊंचाइयों के साथ साथकांग्रेस का असली चेहरा भी लोगों के सामने लाने में कामयाब हो रहा है। #जय_भीम

एडवोकेट ओमप्रकाश वर्मा #डायनामाईट
प्रदेश अध्यक्ष
डॉ अम्बेडकर स्टूडेंट फ्रंट ऑफ इंडिया
राजस्थान 
#गोविंदपुरा #फतेहपुर_रामगढ़ शेखावाटी

Tuesday, 23 November 2021

साथी निसार खान भारू की कलम से


-:मेरी कलम आज लिखेगी शमशेर गांधी का संघर्ष :-
शमशेर पर कुछ लिखू। 
ना मिले जो मंजिल तो  मुकद्दर की बात है। गुनाह तो तब हो जो जीवन में संघर्ष न रहे।
शमशेर गांधी आज राजस्थान में युवाओं का प्रेरणा स्रोत बन चुका है। शमशेर गांधी का जन्म राजस्थान के चुरू जिले के एक छोटे से गांव सेजूसर में हुआ था। शमशेर गांधी कांग्रेस के पुर्व विधायक मरहूम भालू खान के सुपुत्र है। आप पैसे से एक सरकारी ऊर्दू टीचर हैं। आप हमेशा से ही संघर्षशील रहे हो। आपने ऊर्दू के लिए जो संघर्ष किया है वो किसी से छिपा हुआ है। आप 177 दिन धरने पर बैठ थे चूरू मे। आपने अपना सिर भी मुंडवाया था। आपके संघर्ष बहुत हैं लेकिन मैं बात दांडी सद्भावना यात्रा की करूंगा।
एक नवम्बर को जब उस सरकार ने चारों दरवाजे बंद कर दिए जिसको हम 70 सालों से वोट देतें आए हैं। उस सरकार ने सब कुछ नकार दिया। तब एक मर्दे मुजाहिद निकला घर से सर पर मौत का कफन बांद कर और हाथ में गांधी की लाठी और सर पर खादी टोपी पहने निकल गया सेजूसर से दांडी यात्रा के लिए। जब चुरू पहुंचे तो जिस तो माननिय Rafique Mandelia जी ने दांडी यात्रा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उस वक्त शमसेर गांधी में जोश था आव देखा न ताव और चल पङा। उस वक्त कुछ लोग भी 1-2 किलोमीटर साथ चले। और फिर गांधी स्टेप बाई स्टेप चलता रहा। चाहने वाले गांव गांव में मिले और सेल्फी ली फेसबुक पर डाल दी। दांडी सद्भावना यात्रा की। रास्ते में लोगों ने माला डाल दिया और अपनी जिम्मेदारी पुरी होने का सबूत भी दे दिया।
पैराटीचर्स की लङाई लङने वाला शमशेर गांधी एकेला ही चल रहा था कोई साथ नहीं। बस इंतजार ये था कि हमे जोयनिंग कब मिलेगी। लेकिन ये बंदा अल्लाह को गवाह मानकर चलता रहा। पुरे दिन हाइवे पर चलने की वजह से इसके फेफङो में डिजल के धूंए से दिक्कत होने लगी। लेकिन किसी को नहीं बताया चलता रहा। इस बंदे की हिम्मत को मै दात देता हूं। मैं हर दिन फोन करता और कहता केसे हो तो कहता मैं सोई हुई कौम को जगाने निकला हूं। मैं लोगों को उनका हक दिलाने निकला हूं। मैं ऊर्दू अदब को बचाने निकला हूं। मैं सरकार को झुकाने निकला हूं। मैंने कहाँ घर की नहीं सोची तो आखें डबडबा गई गांधी की और उस दिन दांडी यात्रा को 9 दिन हो चुके थे। अजमेर के करीब थी तब दांडी सद्भावना यात्रा। दोस्तो गांधी के उस दिन के आंसू मुझे झकझोर कर छोङ दिया। गांधी ने मुझे कहाँ कि मैं की मेरे बच्चों को मैं अल्लाह के भरोसे छोङ आया हूँ। गांधी के एक अंजली नाम की बेटी जो गांधी को मिनट मिनट में फोन करती पुछती पापा कैसे हो। अब पापा क्या जबाब दे ।पापा भाउक नहीं होता था। गांधी की पत्नी भी बहुत बुरे वक्त से गुजर रही थी लेकिन हिम्मत से काम ले रही थी।
मैं और शमशेर गांधी विडियो काल पर घंटो घंटो बातचीत करते मेरा बात करने का मकसद ये था कि थोङा उनका टाइम पास हो जाए। मैने हजारों फोन किए हैं जब जब मैंने विडियो काल किया तब तब गांधी मुझे रोङ पर अकेला चलता ही मिला। गांधी ने मुझे एक बात कहीं की निसार भारू मैं किस के लिए लङ रहा हूं तो मैंने कहा अल्पसंख्यकों के हक के लिए तो गांधी बोला वो कहाँ हैं और फिर भाऊक होकर अल्लाह से दुआ करने लगा कि अल्लाह सोये हुओ को जगा दे। उस दिन गांधी के आंख के आंसू मुझे शुकून से बैठने नहीं दिया। मैने सोचा मैं एसा क्या करूँ की गांधी की ताकत बन जाऊ। सोचता रहा सोचता रहा। लेकिन कोइ रास्ता नहीं। मैंने गांधी से कहां कि मैं इंडिया आ जाता हूँ और साथ चलते हैं फिर उन्होंने मना कर दिया।
फिर मैने सोचा अपने पास अपनी फेसबुक तो है ये प्लेटफार्म मैं अब सिर्फ गांधी के लिए यूज करूंगा। फिर हम शोसल मिडिया पर सपोर्ट में आए। खैर मेरा छोङो संघर्ष गांधी का हैं उसी पर बात करेंगे।
जब फेसबुक पर आंदोलन को क्रांति का रूप दिया तो चुरू सीकर से मर्दे मुजाहिद आगे आए सबसे पहले Asif Tipu Khan Tayab Mahrab Khan Ali Yunus Hakam Ali Deshwali A. Khan  अमजद खान पहुंचे राजसमंद। फिर राजपुरा कासली झुंझुनू चुरू और कई जिलों से पैराटीचर्स पहुंचे लेकिन उनके पहुंचने से पहले गांधी के पांव में छाले आ कर फूट गए थे। पाव के निचे की पक्की चमङी उतर चुकी थी। अब वो दोर था तब गांधी के पैरों से खून बह रहा है था। शोसल मिडिया पर Arif Ali Bharu को बोलकर मैने एक गाँधी के समर्थन में डीपी फोरमेट बनवाया और शोशल मिडिया के माध्यम से उसको ट्रेंड किया कई हजारों में लोगों ने डीपी चैंज मे गांधी का समर्थन दिया तो धरातल पर भी हलचल होने लगी। अब लोग अपने घरों से बहार निकलना सुरू कर दिया था। सब अपने अपने लेवल पर कोशिश कोशिश करना शुरू किया। लेकिन आंदोलन अब भी अपनी ट्रेक पर नहीं आया तो शोसल मिडिया की एक टीम का गठन किया जिसमे बहुत साथी थे लेकिन जिनकी मेहनत ज्यादा थी उनका नाम लिख दे रहा हूँ Riyaz Khan Fariyad Nazir Khan Bikaner Shahid Kirdoli Azad Khan करामत खान उर्दूअदीब Mudassir Mubeen इमरान क़ायमखानी Asif Khan Ikbal Khan Jugalpura  सैयद इरसाद अली असलम खान भाई खानी अमजद ताखलसर आबिद दाङुंदा आबिद खान गुड्डू युनस सर जाबिर खान अमिरवास आसिफ टिपू नोसाद खान  जाकिर खान किरडोली और भी कई साथी थे जिन्होंने जी तोङ मेहनत की। शोसल मिडिया पर I stand with Shamasher Khan के पोस्टर का ट्रेंड चलावाया अच्छा और साकारात्मक रिजल्ट आ रहा था।
मिडिया मे भी करवेज किया राजस्थान जनमानस Raheem Khan Janmanas Shekhawati First India News Rajasthan The Hindu भास्कर 
फिर जो लोग ज्ञापन दे रहे थे उनमें हमने सोचा बदलाव लाना जरूरी है तो पैदल यात्रा करके ज्ञापन देने के लिए युवाओं को आहान किया तो क्रांति ने छप्पर फाङ दिए। दांडी सद्भावना यात्रा के समर्थन में कमोबेश 37 लाख युवा 3 दिन में राजस्थान की रोङ पर उतर गए। सबकुछ अच्छा चल रहा था हम उदयपुर के करीब ही थे कि शमशेर गांधी के स्वास्थ्य मे बहुत गिरावट आ गई और शमशेर गांधी को हास्पिटलाइज करवाना पङा। बेहोशी की हालत में तैयब महराब आसिफ टिपू और हाकम अली देशवाली भाई वहां दांडी यात्रा के साथ मोजूद थे उन्होंने हालात को काबू पाया और जल्द करीबी हास्पिटल में भर्ती कराया। दोस्तो जब गांधी होश में आया 2 घंटे बाद तो उसका पहला शब्द ये निकला मुह से की मुझे सङक पर ले चलो मुझे दांडी करीब करनी है। हौसला देख कर साथ वाले साथी दंग रह गए। अब सरकार पर दबाव पूर्ण तरह बन चुका था और तकरीबन 83 विधायकों ने शमशेर गांधी के समर्थन में पत्र लिख कर राजस्थान के मुख्यमंत्री को अवगत कराया। लेकिन मुख्यमंत्री की नींद अभी खुली नहीं थी। टीम में बहुत साथी सामिल हुए और समर्थन देकर गांधी की ताकत बनकर साथ चले। गांधी ने सबको कहा की आप वापस घर चले जाए। सब साथी वापस घर आ गये लेकिन 4 लोग वहां पर यथावत रहे आसिफ टिपू तैयब महराब हाकम अली खान देशवाली और अमजद सेजूसर। इनका भी बहुत बङा योगदान है।
अब सरकार जब गांधी की आंधी से घबराई तो प्रशासन का दबाव बनाया लेकिन गांधी हाथ जोङ कर चलता रहा। फिर जब जन सैलाब को रोङ पर उतरा हूआ देखा तो सरकार के अक्ल ठिकाने आने लगी उसको पता चल गया कि अब हवा बदल चुकी है। तो सरकार ने एक और पैंतरा चला लोकडाऊन का वो भी सिर्फ उदयपुर में। तब फिर शोसल मिडिया ने गांधी के समर्थन में विडियो का ट्रेंड चलाया। गांधी को ताकत मिल रही थी और गांधी अपने गन्तव्य की और रवाना होने ही वाला था के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और शिक्षामंत्री गोविंद सिंह टोडासरा की तरफ से वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष श्री Dr Khanu Khan Budwali को सहमति वार्ता के लिए भेजा। जनाब खानू खान बुधवाली साहब ने बङी सुझबूज से हालात को मध्यनजर रखते हुए 22 नवम्बर 2020 को लगभग 6 घंटे चर्चा कर दांडी सद्भावना यात्रा टीम को सहमति पर मनवाया लेकिन उसमे गांधी की मांग ज्यो की त्यों थी। खानू खान बुधवाली और अधिकारियों ने हर एक बिंदु पर गहनता से विचार विमर्श कर रात्री 8 बजे प्रेस कांफ्रेंस में सहमती और रजामंदी की बात कही और उस पर शमशेर गांधी ने सहमति जताई तब गांधी के चाहने वालों में खुशी की लहर थी। लेकिन अचानक फेसबुक पर कुछ तथाकथित पत्रकार फ्लोप आंदोलन और लोलीपॉप जैसे शब्द लेकर आए तो फेसबुक पर नकारात्मक सोच फैलानी की भरपूर कोशिश की लेकिन वो नाकाम रहे अगले दिन 23-11-2020 को टीम उदयपुर से जयपुर और जयपुर से सीकर आ कर शिक्षामंत्री के साथ 4 घंटे वार्ता की और शिक्षामंत्री गोविंद सिंह टोडासरा ने अपने आॅफिसल लेटर पैड पर उन 9 बिंदु पर कारवाई करने के लिए शिक्षा विभाग को भेज दिया जो 2-12-2020 को दुबारा टीम के साथ वार्ता कर आदेश में तब्दील होगा।
अभी भी दांडी सद्भावना यात्रा टीम जयपुर में रूकी हुई है और 2 तारीख का इंतजार कर रही है पेंडिंग काम पुरा करवा कर घर आयेगी।
ये आंदोलन मेरे जीवन का पहला आंदोलन हैं जो शिक्षा के लिए हुआ है।
शमशेर गांधी का ये समाज कर्जदार हो गया है जो कर्जा जिंदगी भर नहीं चुकाया जा सकता। शमशेर गांधी की धर्मपत्नी भी शेरनी निकली जो अशोक गहलोत को चेतावनी दी कि हमें आप झांसी की रानी बनने पर मजबूर ना करे।
शमशेर गांधी का परिवार भी इस जीत में बराबर का हकदार है।
तमाम उन साथियो का संघर्ष भी काबिल तारीफ था जो अपने अपने लेवल पर कोशिश कर रहे हैं थे।
नोजवानो को हक के लिए लङना सिखा दिया। ये एक ऎसी लङाई थी जिसमें ना कोई सरकार का साथ था ना कोई नेता रोङ पर आया ना कोई विधायक रैली के समर्थन में आया। लेकिन फिर भी शमसेर गांधी और युवाओं ने मिलकर साबित कर दिया कि हक के लिए ऐसे लङा जाता है और ऐसे सरकार को घुटने पर लाया जाता है।
सब लोग बधाई के पात्र हैं जो इस दांडी सद्भावना यात्रा के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रुप से सहयोग किया।
शमशेर गांधी जिंदाबाद।
काॅपी करने वालो मेरी अंगुली के बारे में भी सोचना लिखते लिखते दुखने लग गई है।
निसार भारू ✍️✍️✍️✍️✍️

Saturday, 20 November 2021

Friday, 19 November 2021

14 नवम्बर इस्तीफा (अनिवार्य सेवा निवृत्ति) बाबत

सेवामें,
श्रीमान शिक्षा मंत्री महोदय,
प्रारम्भिक व माध्यमिक शिक्षा
जयपुर,
विषय;- संविदा कर्मियों के नियमितीकरण न करने के विरुद्ध अनिवार्य सेवानीवर्ति बाबत।

महोदय,

  विषयान्तर्गत सादर निवेदन है कि
(क)
1) 5 जुलाई 2019 से चूरू कलेक्ट्रेट के सामने 
A. उर्दू विषय व 
B.संविदा शिक्षकों के नियमितीकरण 
C. अल्पसंख्यक समाज की समस्याओं के समाधान बाबत धरना शुरू किया गया जिसे 117 दिन बाद 27 अक्टूबर 2019 को चूरू प्रत्याशी माननीय मुख्यमंत्री महोदय के निर्देशानुसार कोंग्रेस रफ़ीक़ मंडेलिया जी के आश्वासन व जिला कलक्टर चूरू (जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक व प्रारम्भिक के प्रस्ताव) उपरांत धरना समाप्त किया गया।

(ख)

माह सितम्बर 2020 में शिक्षा निदेशक श्रीमान सौरभ स्वामी के तानाशाही आदेश एक विद्यालय एक तृतीय भाषा का आदेश निकाला जिस से अल्पभाषा के अस्तित्व पर ही प्रश्नचिह्न लगा। 
27 अक्टूबर के समझौते की अवहेलना व उक्त आदेश के विरोध में दांडी पैदल यात्रा 1 नवम्बर 2020 से चूरू (राजस्थान) से दांडी(गुजरात)
प्रारम्भ की गई जो एक जन आंदोलन बन गई।
इस आंदोलन को समाप्त करवाने के लिये 22 नवम्बर 2020 उदयपुर समझौता राज्य सरकार के प्रतिनिधि खानु खान बुधवली (तत्कालीन चैयरमेन राजस्थान वक़्फ़ बोर्ड,जयपुर) की मध्यस्थता में सौरभ स्वामी जी तत्कालीन निदेशक शिक्षा विभाग बीकानेर, जिला कलक्टर उदयपुर, अतिरिक्त जिला कलक्टर उदयपुर,JD शिक्षा विभाग उदयपुर, अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी उदयपुर व दांडी यात्रियों के मध्य हुआ जिसमें 09 बिंदु चिह्नित किये गये जिन्हें 30 सितम्बर 2021 तक पूर्ण करने की समय सीमा लिखित में तय की गई।

इस समझौते के 09 बिंदुओं को पूर्णतया लागू करने के लिये 02 दिसम्बर 2020 को शिक्षा सचिव अपर्णा आरोड़ा की अध्यक्षता में श्रीमान खानु खान बुध्वाली, सौरभ स्वामी, कॉलेज शिक्षा, मदरसा बोर्ड, अल्पसंख्यक मामलात विभाग की समीक्षा बैठक हुई व तय 09 बिंदुओं की पालना पूर्ण करने की सहमती बनी।
फलतः 22 नवम्बर को दांडी यात्रा स्थगित कर जयपुर पहुंचे व 22 दिसम्बर 2020  को जयपुर से चूरू पहुँच हुई।

(ग)
 बार-बार  शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा जी, अल्पसंख्यक मामलात मंत्री सालेह मोहम्मद जी,वक़्फ़ बोर्ड चैयरमेन खानु खान बुध्वाली जी, सौरभ स्वामी जी से सम्पर्क किया जाता रहा जिस से तय समय सीमा तक काम पूर्ण हो सके परन्तु खेद के साथ कहना पड़ रहा है कि स्टाफिंग पैटर्न माध्यमिक शिक्षा व प्रारम्भिक शिक्षा के अलावा कोई बिंदु पूर्ण नहीं किया गया व बिंदु संख्या 01 पर कोई कार्यवाही नहीं की गई जिस से व्यथीत हो कर 
30 सितम्बर तय समय सीमा पर मुख्यमंत्री आवास पर मुख्यमंत्री महोदय से मुलाकात के प्रयास किये गये परन्तु सभी साथियों (शिक्षाकर्मियों,राजीव गांधी पैरा टीचर व मदरसा पैरा टीचर) को गिरफ्तार किया गया। 

इस पर 2 अक्टूबर से पूर्व में स्थगित की गई दांडी यात्रा उदयपुर (राजस्थान) से दांडी ( गुजरात) पुनः शुरू कर दी गई जो 07 नवमवर को डुंगरपुर जिले के खजूरी गांव के पास 5000 लोगों को जिला कलेक्टर डूंगरपुर व पुलिस प्रशासन द्वारा बलात रोकी गई व मुख्यमंत्री महोदय से वार्ता की जिम्मेदारी स्वयं व्यक्तिगत सचिव देवाराम सैनी साहब से दूरभाष पर वार्ता करवाकर जयपुर भेज दिया गया व प्रतिनिधिमंडल 08 दिन तक इंतज़ार करता रहा अफसोस मुख्यमंत्री महोदय से वार्ता नहीं हो सकी। 

(घ)
सरकार की इस दमनकारी नीति व उदासीन रवैये के विरोध में 15 अक्टूबर 2021  शहीद स्मारक जयपुर पर धरना व 21 अक्टूबर 2021 से अनशन शुरू कर दिया गया।
सरकार द्वारा इस पर भी कोई  ध्यान नहीं दिये जाने के विरोध में 01 नवम्बर 2021 से 06 नवम्बर 2021 तक सभी संविदा शिक्षक (महिला,पुरुष व बच्चे) लगभग 15000 की संख्या में महापड़ाव के रूप में धरना स्थल पर उपस्थित हुये व दिवाली का त्योंहार (काली दिवाली) मनाया ।
सर्वधर्म प्रार्थना सभा (शबद-कीर्तन-अरदास, कुरआन का पथ व दुआ व सद्बुद्धि यज्ञ) के पश्चात महापड़ाव समाप्त किया गया जिस का मुख्य कारण लोगों में भुखमरी रहा।
इस पर भी सरकार का दिल नहीं पसीज रहा इसलिये में सरकार का कर्मचारी रहने में अपने आपको हीन समझता हूं व अनिवार्य सेवानीवर्ति की घोषण करता हूँ।

ईश्वर सरकार को सद्बुद्धि दे व आम जनता की समस्याओं को सुन कर समस्या निवारण की सलाहियत दे।

दिनांक- 14.11.2021 बाल दिवस
स्थान- शहीद स्मारक जयपुर।

शमशेरभालु खान
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