Thursday, 23 December 2021

मुन्नवर खान अजमेर

अस्सलामो अलैकुम भाई जान में अजमेर से हू सर् मदरसा पैराटीचर्स मुनव्वर हुसैन आपको याद है आप अजमेर आये थे रैली में मैने नात शरीफ पढ़ी थी।सर् आपने हमारे लिए  बहुत कुछ किया है आपने अपना घर बार छोड़ कर बीवी बच्चो को छोड़कर सिर्फ हमारे लिए, हमे हमारा हक दिलाने के लिए आज तक धरने पर बैठे हो ये आपका एहसान हम ताउम्र नही चुका पाएंगे।सर् जब मदरसा पैराटीचर्स का कोई धनी धोरी नही था हम अपने आप को अनाथ ही समझ रहे थे लेकिन अहसान उस अल्लाह करीम का जिसने आपको मसीहा बनाकर हमारे बीच मे भेजा कसम खुदा की आज हमें एहसास है कि हम अकेले नही है हमारा भी कोई सिपेसालार है जो जयपुर की धरती पर सीना ठोक कर खड़ा है जिसने कुछ ही दिनों मे सरकार की नाक में नकेल कसने का काम किया है हमे फक्र है अपने नसीब पर की अल्लाह ने हमारे बीच एक मोती भेजा है जिसका नाम है ठाकुर शमसेर खान गांधी।जिसने कुछ ही दिनों में पूरे राज्य में अपना लोहा मनवाया है साहब ये अहसास में कर सकता हूँ कि घर बार सब कुछ छोड़कर बिना कुछ खाये हुवे अनसन पर बैठना कैसा होता है, मुझे बढ़ी तकलीफ होती है साहब इस कौम को देखकर क्या ये कौम अपने आप मे तब्दीली नही करना चाहती, क्या हुआ है इस कौम और कौम के नुमाइंदों को आखिर ये कब तक अपने हक की लड़ाई लड़ने के लिए तैयार होंगे ,में इस कौम ओर कौम के नुमाइंदों से गुजारिश करूँगा की ये गाँधी नही आँधी है शेर नही शमसेर है ये समझो कि मौला अली की समसीर लेके निकले है इस हक की लड़ाई में इनका साथ दो और इनके साथ हो जाओ फिर देखो एक ही शेर इंक़लाब ले आएगा और अपना वजूद हमेशा के लिए कायम हो जाएगा।आज तक इस कौम ने सिर्फ जाजम बिछाने का काम किया है आज समय आया है जाजम पर बैठने का गाँधी के जरिये अभी नही तो कभी नही क्या सारी उम्र जाजम बिछाने का और भीड़ लाने का ही काम कोरोगे आज एक बंदा कुछ सही करने के लिए आया है तो क्यो नही उनका साथ देते अपने ख्वाबो की दुनिया से बाहर आइये जनाब हकीकत जमीन पर आईये इंशा अल्लाह जो आपने ख्वाब देखे है उनको हकीकत बनाने का समय आ गया है उठिये और आइए अपनी कौम के बेटे के साथ उनके कंधे से कंधा मिलाइये उनकी हिम्मत बनिये मेरा एक भाई आँखे गढोये हुवे बाट जो रहे है कि मेरे भाई आएंगे मेरी कौम आएगी और मेरी हिम्मत बनेगी जागो भाइयो जागो ओर गाँधी के साथ हो जाओ फिर देखना कसम खुदा की सरकार खुद तुम्हारी ठोकरों में होगी।भाईजान में तो यहीं कहूंगा कि आपके हिम्मत को सलाम, आपके जज्बे को सलाम आपके किरदार को सलाम, आपने कौम के हक को दिलाने के लिए उठाए हुवे कदम को सलाम, आपका ये सरहनीय काम, आपकी ये कुर्बानिया आपकी ये हिम्मत हमेशा याद रखी जायेगी।में तो इतना ही कहूंगा कि में और मेरा परिवार ,मेरा खानदान आपकी हर लड़ाई में आपके साथ है तन मन और धन से ,जँहा जँहा हक की बात होगी वँहा वँहा शमशेर खान की बात होगी।आखिर में आपसे गुजारिश करता हु की अल्लाह के लिए अनसन तोड़ दे आप हमारी खातिर अपनी जान जोखिम में मत डालिये हमे ये सौदा मंजूर नहीं जिसमे जान का खतरा हो।अल्लाह आपकी उम्र को दराज करे,अल्लाह से दुआ है अल्लाह आपकी मेहनतों ओर कोशिशो को कबूल फरमाये।अल्लाह आपको सेहत और तंदरुस्ती अता फरमाये, अल्लाह आपकी हर मुश्किल आसान फरमाये आपके घर और खानदान को सलामत रखे ।अल्लाह कुरआन में फरमाता है फाइन म अल उसरे यूसरा : तर्जुमा ये है कि हर मुश्किल के बाद आसानी है।अल्लाह आपके सफर को आसान फरमाये।में आपसे एक बार फिर गुजारिश करता हु की इस अनसन को तोड़ दीजिये ओर हमे हमारे हाल पर छोड़ दीजिए।इंशा अल्लाह आपने जो मसाल जलाई है वो हमेशा रोशन रहेगी अल्लाह ने चाहा तो आपकी कुर्बानिया जाया नही जाएगी, आपकी मेहनत रंग लाएगी आपने जो शमा जलाई है अंधेरे से उजाले की ओर वो वक्त आएगा।
" अल्लाह ने ये अहसान फरमाया
हमे समशेर नही, अली का शेर दिया"
आपका छोटा भाई, मुनव्वर हुसैन मदरसा पैराटीचर् अजमेर

Thursday, 16 December 2021

हमारा आंदोलन व समाज के विधायक

सुबे में शमशेर खान गांधी की कयादत में लगभग 63 दिन से शहीद स्मार्क जयपुर में गांधी वाधी  विचारधारा से मदरसा पेराटीचर्स राजीव गांधी पैराटीचर्स शिक्षाकर्मियों का धरना उनकी  नियमतिकरण की  वाजिब माँग को लेकर जारी है   सरकार ने भी  अपने इंतखाबी मंसूर  2018 (जनघोषण पत्र)में वायदा किया था की सत्ता में आते ही मदरसा पैराटीचर्स व तमाम संविधाकर्मियों को नियमित कर दिया जायेगा सरकार 17 दिस्मबर को अपने कार्यकाल की तीसरी वर्षगांठ मनाने जा रही है  लेकिन हकीकत यह है   की माइनरेटी के सर्वांगीण विकास के अहम मुद्दे को  लेकर सरकार गंभीर नजर नही आती तीन वर्ष मुकम्मिल होने पर भी माइनरेटी से जुडे इदारों  के निगम बोर्ड आयोग में अब तक चैयरमेन नही बनाये गये  2008 में भी कांग्रेस सरकार ने मदरसा पैराटीचर के  नियमितिकरण की घोषणा की थी सरकार भी बनी वजीरे आला बने अशोक गहलोत साहब लेकिन वायदा 2008 के वक्त भी वायदा ही बन कर रह गया 2018 का  भी सफर धिरे धिरे आने वाले इंतखाबी चुनाव 2023 की बडता जा रहा है सुबा  ए राजस्थान  में कांग्रेस में  माइनरेटी का वोट बैंक 24 केरेट सौने की तरह है जिसकी शुद्धता कांग्रेस आलाकमान भी मानता है सभी कास्टो  में मुस्लिम समुदाय ही एसा है वर्ग है जो की कांग्रेस को थोक के भावों वोट देता आया है  जिनका मत  प्रतिशत सार्वाधिक होता है  विधायक भी बनते  है मंत्री भी बनते है यहाँ तक की सुबे की होट सीटें टोंक , सरदारपुरा से सीएम के चेहरों को भी जीता कर विधानसभा भेजते है 2018 में भी सत्ता का सिंहासन मिलने में  100 सीटों में लगभग  90 सीटों जिताने में मुस्लिम समुदाय ने अहम भूमिका निभाई थी    सत्ता हासिल करने के बाद सरकार अपनी ही पार्टी में आपसी कलह गुटबाजी के दौर से गुजर रही थी   मुख्यमंत्री के सिंहासन को  बचाने में भी माइनरेटी के 9 विधायक सुरक्षा कवच बनकर साथ निभा रहे थे  उसका इनाम ओ  इकराम बस इतना ही मिलता है की सौ फीसदी वोट देने वाले समुदाय से महज मंत्रीमंडल में दो मंत्री ही बनते है  सत्ता में भागीदारी तो दूर लेकिन सुबे के अक्लियत के लोगो का मदरसा पैराटीचर्स पर नियमतिकरण पर सरकार की खामोशी अपने आप को अक्लियत के खैरखवाह कहने वाले वजीरे आला जनाब अशोक गहलोत साहब  भी सवालों के घेरे में हैं शहीद स्मारक पर शमशेर खान  गांधी के आह्वान पर विधायकों के आवास पर धरने भी दिये जा रहे है कोटा में काबीना वजीर शांती  धारीवाल साहब के आवास पर निरंतर धरने  के दौरान कौम की बेटी  नाजमीन की तबीयत अचानक बिगड जाती है अस्पताल में इलाज के दौरान इंतकाल हो जाता है फिर भी सरकार की चुप्पी बनी रहती है  टोंक प्रभारी  मंत्री  शाले  मोहम्मद के टोंक में आगमन पर  मदरसा पैराटीचर्स का सब्र का पैमाना भी  टूट गया  अपने नियमतिकरण को लेकर अल्पसंख्यक मामलात विभाग के आधीन आने वाले मदरसा पैराटीचर पर पुलिस ने दमनकारी रवैया अपनाते हुए  बल का प्रयोग किया यहाँ तक कि महिलाओं  को भी धक्के मारे लाठी चार्ज   की   महकाम ए अक्लियत के  काबीना वजीर शाले मोहम्मद  को भी विरोध का सामना करना पडा   ,पाली में प्रभारी मंत्री टीकाराम जूली सवाइमाधोपुर में प्रभारी मंत्री भजनलाल जाटव बीकानेर में शिक्षा मंत्री बीडी कल्ला जी का घेराव किया कांग्रेस सरकार के खिलाफ एहतजाज किया इन नारों की गूंज तो वजीरे आला हुकूमते राजस्थान  तक जरुर पहुँची होगी अगर अब भी सरकार ने संवेदनशीलता नही दिखाई तो मंत्रीयों के घेराव इसी तरह होंगे   माइनरेटी को अपनी बैकबोर्न कहने वाली कांग्रेस के राज में राजस्थान में अक्लियत को अब तक  अपना   हूकूक  नही मिला  है जिसकी वाकई हकदार है    माइनरेटी के 9 विधायक  को खामोशी को तोडकर इस मुद्दे पर आगे आना चाहिए। मंत्रीमंडल का विस्तार भी हो चुका है फिर अब अपनी कौम के लिये आवाज उठाने में डर कैसा  इनमें कोई मदरसा पेराटीचर उर्दू की बदहाली  मुस्लिम वेलफेयर के मामलों में बीरबल भी बनता नजर नही आ रहा है देवली उनियारा विधायक हरीश मीणा साहब ने मंच के माध्यम से शाले मोहम्मद के सामने ही मदरसा पैराटीचर के नियमतिकरमन का मुद्दा उठाया केबीनेट मंत्री हेमराज चोधरी लगातार पैरवी कर रहे है  चाकसू विधायक वेदप्रकाश सोलंकी साहब  अपनी बात को बैबाकी से रखने के लिये जाने जाते है हाल ही में शिक्षक संघ के एक प्रोग्राम में  खुले मंच से मदरसा पेराटीचर अन्य संविधाकर्मियों को नियमित करने का जनघोषणा पत्र का सरकार का किया हुआ  वायदा याद दिलाया की  सत्ता में आते ही तमाम सविंधाकर्मियों को नियमित करेंगे   वजीरे आला हुकूमते राजस्थान के राज मे्  अक्लियत के लौगो को अपनी माँगे मनवाने के लिये सडको पर आना पड रहा है जोधपुर कांग्रेस कार्यालय के बाहर धरना दे रहे मदरसा पैराटीचर से वैभव गहलोत मुलाकात भी नही करते है इसकी एवज में धक्के मिलते हैं अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी महासचिव  कांग्रेस प्रदेश प्रभारी अजयमाकन वक्त वक्त पर  सियासी मिजाज को भापंने जयपुर आते रहते है उनको भी माइनरेटी के मदरसा पैराटीचरस का दर्द या यू कहें की हमारे जनघोषणा पत्र का वायदा है नजर नही आता अगर अब भी माइनरेटी को नजरअंदाज किया तो  2023 में सत्ता वापसी के कांग्रेस के टारगेट में मंजिल आसान नही होगी भरतपुर नगर से विधायक वाजिब अली साहब के कौमी जजबे को सलाम  उन्होंने  मदरसा पैराटीचर्स को नियमित करने की  हिमायत कर सर्द मोसम में चल रहे आंदोलन को पुरी तरह से अपना  समर्थन दिया सरकार से मुतालबा कर  यहाँ तक कह दिया की अगर नियमित नही  किया तो में अपना इस्तफा दे दूंगा  सुबे के करीब 100 विधायकों ने मदरसा पैराटीचर्स अन्य सविंधा कर्मियों के नियमतिकरण के अनुशंसा की है माइनरेटी के सभी विधायकों इस मसले पर खुल कर सामने आकर मुख्यमंत्री के समक्ष पुर जोर तरीके से अपनी बात रखनी चाहिए। नियमतिकरण करवाकर शमशेर गांधी साहब का अनशन समाप्त करवाना चाहिए।
शाहरूख खान

Monday, 13 December 2021

चूरू विधानसभा क्षेत्र में सड़क निर्माण

नक्सा चूरू सड़क निर्माण बाबत

सेवामे,
श्रीमान अशोक गहलोत जी,
माननीय मुख्यमंत्री महोदय
राजस्थान सरकार,
जयपुर।
विषय:- चूरू तहसील की पंचायतों को आपस मे जोड़ने हेतु सड़क निर्माण बाबत।
सन्दर्भ:- (1)राजस्थान सरकार की 
            पंचायत से पंचायत जोड़ो 
             योजना।
            (2)प्रधानमंत्री/मुख्यमंत्री 
             ग्राम सड़क योजना,
            (3) नाबार्ड,वित्त आयोग व 
            कृषि उपज मंडी योजना।
महोदय जी,
           उपरोक्त विषय एवं संदर्भानुसार सादर निवेदन है कि चूरू  तहसील लगातार काफी समय से राजनीतिक उत्पीड़न का शिकार हो रही है जिस के कारण  चूरू तहसील के 31 गांव आपस मे जुड़ने से वंचित रह गये हैं जिस का विवरण निम्नानुसार है।
1) खण्डवा-पिथिसर     7 km
2) रिबिया-पिथिसर      7 km
3) पिथिसर-चूरू।        12 km
4) घंटेल-दुधवामीठा।   7 km
5) सहजूसर-मुनीमजीकीढाणी 6km
6) गाजसर-दुधवामीठा  8 km
7) रिड़खला-पिथिसर   4 km
8) झारिया-घंटेल         5 km
9) गिनड़ीपलो.-झारिया 5km
10) आसलखेड़ी-झारिया 6 km
11) इंद्रपुरा-झारिया     5km
12) खींवासर-झारिया  6 km
13) भेरूसर-आसलखेड़ी 5 km
14) झारिया-भेरूसर।   5 km
15) लालसर-सहजूसर  7 km
16) भमासी-सहजूसर  7 km
17) कड़वासरा-भामासी3 km
18) चलकोइ-खींवासर  5 km
19) मथोडी-थालोड़ी     5 km
20) इंद्रपुरा-मथोडी     5 km
21) मथोडी-दूधवाखारा 6 km
22) गिनड़ी टिब्बा-कड़वासर 6 km
23) मथोडी-जवानीपुरा  5 km
24) दुधवामीठा-पिथिसर6 km
25) राणासर-चूरू         6 km
26) घांघू-राणासर        5 km
27) बुंटिया-आसलू  (u)7 km
28) ढाढर-बुंटिया।   (u)5 km
29) सातडा-पोटी।        7 km
30) आसलू-भामासी(u)6 km
31) चूरू सर्किल।    (2u)35 km
32) चूरू शहर(डिवाइडर)20 km
        आप से निवेदन है कि कृपया उक्त सड़को का निर्माण करवा कर चूरू विधानसभा क्षेत्र की सभी पंचायतों को आपस में जुड़वाकर अनुग्रहित करें।
    हम सदैव आप के आभारी रहेंगे।
      धन्यवाद।
                              भवदीय
                        निवासीगण चूरू
                  (विधानसभा क्षेत्र, चूरू)
      👆✍️ ठाकुर शमशेरभालु खान
                        सहजूसर, चूरू।
                     📞9587243963

Friday, 10 December 2021

दिल्ली कार्यक्रम

12 दिसम्बर के बाद कार्य नहीं होने पर दिल्ली कूच 
दिनांक 13 दिसम्बर 2021
*जयपुर से दिल्ली पेट के बल लुढ़ककर मार्च*

महात्मा गांधी सर्किल जयपुर वाया राजघाट दिल्ली से 24 अकबर रोड अखिल भारतीय कांग्रेस कार्यालय तक।

*यह 268 किलोमीटर यात्रा पेट के बल लुढ़ककर पूरी की जायेगी।*

*विषय:- संविदा कार्मिकों (राजीव गांधी पैरा टीचर, शिक्षाकर्मी व मदरसा पैरा टीचर ) का नियमितीकरण व 22.11.2020 उदयपुर समझौते को लागू करवाने बाबत*

1 महात्मा गांधी सर्किल-दरगाह चार दरवाजा
2 दरगाह-आमेर 7 किमी
3 आमेर-कूकस 7 किमी
4 कूकस-अचरोल 14 km
5 अचरोल-चंदवाजी 11 
6 चंदवाजी-मनोहरपुर 11
7 मनोहपूरा-शाहपुरा 9 
8 शाहपूरा-भाभरू 13 
9 भाभरू-पावटा 19 
10 पावटा-कोटपूतली 19
11 कोटपूतली से 11 किमी
12 विश्रामगृह-बहरोड़ 14
13 बहरोड़-नीमराना 16 
14नीमराणा-शाहजहांपुर 7
15 शाहजहांपुर-बावल 20
16 बाबल-धारूहेड़ा
17 विश्रामगृह-धारूहेड़ा 12 
18 धारूहेड़ा-मानेसर 24 
19 मानेसर-गुड़गांव 16 
20 गुड़गांव-दिल्ली 14 किमी
21 विश्रामगृह-राजघाट 14
22 राजघाट-24 अकबर रोड

*अनिश्चितकाल के लिये।*

शमशेरभालु खान गांधी
9587243963

Monday, 6 December 2021

मांगपत्र उर्दू

मांग पत्र 
सेवामें श्रीमान ...........
विषय :- उर्दू, पंजाबी, गुजराती,सिंधी, कक्षा 1 से 5 पूर्व की भांति अल्प भाषा विषय शिक्षण हेतु स्वीकृति देने बाबत
महोदय,
उपरोक्त विषय अंतर्गत सादर निवेदन है कि राजस्थान में वर्ष 2016 से पूर्व एक विद्यालय में सभी विषय जो छात्र पढ़ने के इच्छुक होते थे पढ़ाए जाते थे परंतु भाजपा सरकार द्वारा एक विद्यालय एक तृतीय भाषा नियम लागू किया गया जिसके कारण अन्य चार तृतीय भाषाओं के पढ़ने वाले बच्चे प्रभावित हुए।
 1 नवंबर 2020 से शुरू हुई दांडी यात्रा में हुए समझौते के अनुसार स्टाफिंग पैटर्न में संशोधन किया गया जिसके अंतर्गत जिस विद्यालय में कक्षा 06 से 08 में कुल 10 बच्चे किसी तृतीय भाषा के लिये सहमति देते हैं तो वहां पद स्वीकृत होगा।
प्रारंभिक शिक्षा विभाग द्वारा स्टाफिंग जारी कर दिया गया व माध्यमिक शिक्षा विभाग का स्टाफिंग पैटर्न अभी भी होना शेष है।
अभी तक प्रारंभिक शिक्षा में कक्षा 1 से 5 मुख्यमंत्री जी की बजट घोषणा के अनुसार जिस विद्यालय में कक्षा एक से पांच में पढ़ने वाले या पढ़ने के इच्छुक 20 छात्र होंगे तो वहां पर पद स्वीकृत होगा जिसकी परिणीति अभी तक नहीं की गई है अतः निवेदन है कि 
(1)  सेकेंडरी सेटअप का स्टाफिंग पैटर्न तुरंत लागू किया जाए 
(2) कक्षा 1 से 5 प्रारंभिक कक्षाओं में अल्प भाषा के 20 छात्र जिस जिस विद्यालय में इच्छुक हैं वहां पद स्वीकृत किए जाएं 
(3)जिन विद्यालयों द्वारा इच्छुक छात्र होते हुए भी सही मैपिंग नहीं की गई उनमें पुनः मेपिंग करवाई जाए
(4) दोषी प्रधानाध्यापकों विरुद्ध कार्यवाही की जाए।
(5) जिन विद्यालयों में अभी तक मैपिंग नहीं की गई है वहां मैपिंग करवाई जाए व मैपिंग नहीं करने के दोषी प्रधानाचार्य/ प्रधानाध्यापकों के विरुद्ध कार्यवाही की जाए।
(6) जहां-जहां अल्पभाषा के छात्र छात्राएं चाहे वह किसी भी भाषा के हो पंजाबी, गुजराती, सिंधी,उर्दू उनकी इच्छा अनुसार उन्हें विषय चुनने का स्वतंत्र अधिकार दिया जाए व प्रधानाध्यापक या अन्य स्टाफ द्वारा दबाव डालकर अन्य भाषा पढ़ने हेतु स्वीकृति ली गई है उसे पुनरीक्षित कर उन्हें मैपिंग करवाई जाए।
(7) भविष्य में 2016 की तरह कोई खिलवाड़ न कर सके इसके पुख्ता इंतजाम किये जावें।
(8) अल्पभाषा की पाठ्यपुस्तक समय पर उपलब्ध करवाई जावें।
आदर सहित

धन्यवाद
                भवदीय

Friday, 3 December 2021

समाज अपराध व पुलिस

-: समाज अपराध और रक्षक :-
समाज:-
   समान मान्यता व धारणाओं के लोगों का समुह जो जन्म से मृत्यु तक किन्ही अलिखित नियमों का पालन करता है। समाज के अंग धर्म,जाति, उपजाति(गोत,गोत्र,नख) होते हैं। सभी लोगों का एक जैसा धर्म नहीं होता पर स्थानीय परम्परा व मान्यता समान होती हैं।
          अपराध:-
अपराध दो प्रकार के होते हैं
1) समाज के नियमों का उलंघन
2) देश के नियमों का उल्लंघन
यदि कोई व्यक्ति समाज के नियमों का पालन नहीं करता है तो समाज(बिरादरी) के लोग उक्त को नियमों की पालना के लिये शारीरिक दंड तो नहीं दे सकते पर समाज से बहिष्कार या जात बाहर कर देते है जिस का पुराना नाम हुक्का-पानी बन्द कर देना है। इस के अलावा सामाजिक तिरस्कार भी एक बड़ा साधन होता है जिस से लोगों पर नियंत्रण किया जाता है।
जो व्यक्ति सामाजिक नियमों का पालन नहीं करता है वो सामाजिक अपराधी की श्रेणी में आता है,ओर समाज के पास समुचित व्यवस्था इस प्रकार के कृत्यों को रोकने की है। इन में अपराधी के बचने की संभावना न्यून होती है ओर फैसला भी तुरंत हो जाता है। अपराध नियंत्रण की यह व्यवस्था अरब देशों व आदिवासी समुदाय में आज भी प्रचलित है।
  राष्ट्र या देश की व्यवस्थाओं के सही संचालन के लिए बनाये गए नियमों के उल्लंघन करने का अपराध जटिल और पेचीदा और लिखित कानून के दायरे में आते हैं जिन का चिह्नीकरण,पंजीयन, रोकथाम एवं निषेध की एक प्रक्रिया के माध्यम से होता है। 
   आजकल सभ्य समाज मे पुरानी व्यवस्था के स्थान पर यही व्यवस्था काम मे ली जाती है। जिस की महत्वपूर्ण जिमेदारी सरकार और उस के आंतरिक सुरक्षा विभाग (पुलिस) की है।
पुलिस की अपराध नियंत्रण प्रणाली :-
    समाज मे व्यक्ति रहते है जो एक जैसी सोच समझ के नहीं हो सकते। एक ही स्थान पर रहने वाले व्यक्तियों का व्यवहार भिन्न-भिन्न होता है। और यहीं से शुरू होती है असामाजिकता। इस पर नियंत्रण व रोकथाम के लिये पुलिस का काम भी इसी समाज मे छुपे विपरीत व्यवहार के लोगो की पहचान कर उन को सही सजा दिलवाने का होता है।
   समाज का पुलिस के प्रति कर्तव्य:-
  हमे असामाजिक व्यक्तियों की संपूर्ण सूचना पुलिस को देनी चाहिए और सही दिशा में उन का सहयोग करना चाहिये पर क्या हम ऐसा करते हैं यह सोचने लायक बहस हो सकती है जिस के बारे में आईन्दा लिखना बेहतर रहेगा। फिलहाल हम सकारात्मक स्तर पर सोच रख कर कह सकते है कि हम जो भी प्रक्रिया है उस के अधीन सामाजिक व्यवहार को बनाए रखने में पुलिस की मदद करें।
महत्वपूर्ण बात क्या पुलिस स्वतन्त्रता पूर्वक बिना भेदभाव व द्वेष,लोभ या लालच के अपना करती है। 
  इस सवाल के जवाब में सभ्य/असभ्य समाज का प्रतिबिम्ब उभर कर सामने आता है। आप मैं और हम इस पर बहस कर सकते हैं ।
  कुछ उदाहरण
हम जानते हैं एक बुराई का आधार 100 जुर्म हैं और एक जुर्म को रोकने से 100 अपराध रुक सकते है।
बलात्कार की घटनाओं पर गौर करेंगे तो 99% बलात्कारी शराब के नशे में पाये जाते हैं और इस हक़ीक़त से इन्कार नहीं किया जा सकता कि शराब का कारोबार विधि सम्मत दुकान(ठेकों) के स्थान पर गैर कानूनी रूप से ज्यादा फल-फूल रहा है जिस के लिये किये गए सर्वे के अनुसार 90% पुलिस जिम्मेदार है। जिस का काम अपराध की रोकथाम था वो अपराधियों के साथ मिलकर इस काम को बख़ूबी अंजाम दे रही है और मेरी मान्यता के अनुसार यहां पर प्रांरम्भिक अवस्था का मुज़रिम पैदा हो जाता है।
एक क्षेत्र में मेरे स्वयं द्वारा की गई तफ्तीश के अनुसार 1 सरकारी नियमों के अनुसार ठेका स्वीकृत है पर उसी ठेके की 15 से 20 ब्रांच खुले आम संचालित की जा रही हैं पुलिस की नाक के नीचे। उन से इस के संचालन की प्रक्रिया पूछी जाने पर बताया मुख्य थाने पर 15000 मासिक ओर चौकी पर 5000 मासिक हर महीने ईमानदारी से पहुँचा दिया जाता है जिस के बदले में या तो वो आते नहीं और शिकायत या दूसरे कारण से आते हैं तो किसी माध्यम से   पहले ही सूचना पहुंचा देते हैं कि आज इस समय लगभग हम आएंगे सम्भल कर रहना। बड़ी चलाकि के साथ शिकायत कर्ता/सिस्टम को धत्ता बता दिया जाता है। 
  इसी तरह किसी हत्या का जघन्य अपराध होने पर भी 10 हत्यारों में से 7-8 के नाम बड़ी आसानी से सुविधा शुल्क ले कर निकालना किसी से छुपा नहीं है। ओर fir/तफ्तीश के भारी भरकम शब्दों के जाल में उलझा कर शेष को किस तरह आज़ाद किया जाता है ये भी हम भली-भांति जानते हैं।  अपराधी के विरुद्ध कमज़ोर वर्ग का अभियोजन या तो लिखा ही नहीं जाता है और लिख भी दिया जाए तो इस तरह तोड़-मरोड़ कर लिखा जाता है कि न्याय की आशा शून्य के समान रहती है।
           पुलिस के बाद न्याय की रक्षा की जिम्मेदारी अदालत की होती है शब्द अदालत अरबी भाषा के अदल से बना है जिस का अर्थ होता है न्याय और अदालत का अर्थ न्याय का स्थान। 
क्या आजकल के अदालत के न्याय से ओर उस मे छुपे अन्याय या न्याय में देरी के कारण अपराध को बढावाव नहीं दे रहे हैं। देरी से किया गया न्याय भी अन्याय की श्रेणी में आता है जो आजकल का एक सभ्य प्रचलन बन गया है। दूसरे न्याय का आम आदमी की पहुंच से दूर होना किसी मासूम पर हुई ज़ोर-जबरदस्ती पुलिस ने दर्ज भी कर ली तो मुल्ज़िम को जमानत मिल जाती है और मुस्तगिश की जान माल को ख़तरा दबी ज़बान सभी स्वीकार कर लेंगे।
  आप के सामने उदाहरण है दिल्ली का निर्भया काण्ड जिसे 10 साल से ऊपर हो गये अपराध सिद्ध हो गया पर अपराधी अब भी जिंदा है और नागरिकों के खून पशीने की कमाई से दीये गये टेक्स को मज़े ले कर चर रहे हैं। कठुआ का 7 साल की बच्ची से बलात्कार और उस मे पुलिस की भूमिका ओर 4 साल बाद भी न्याय नहीं मिलना,ज़ालिमों का ज़िंदा होना,यूपी के विधायक-पूर्व सांसद का हस्पताल में होना व मज़लूम का ज़ेल में होना क्या न्याय कहा जा सकता है उस पर समाज के कुछ दूषित मानसिकता के लोगों का धर्म/जाति को खोजना दुर्दांत मानसिकता का परिचायक है।
         जाके पैर फ़टे ना बियाई।
         वो क्या जाने पीर पराई।।
हम प्रबुद्ध समाज का निर्माण कैसे कर सकते है हर संस्था,नागरिक,सरकार व कानून के पालक को कुछ देर अपने आप को उस मज़लूम के स्थान पर रख कर अपने कलेजे पर हाथ रख कर सोचना होगा कि ये अपराधी किसी जाति धर्म के नहीं इन की एक ही जात है सिर्फ और सिर्फ अपराधी/कातिल।
  आइये हम मिलकर नये सभ्य समाज के निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा कर आत्मा को संतोष प्रदान करें।
                    
            ठाकुर शमशेरभालु खान