Tuesday, 21 October 2025

लघुकथा -जो जिसके काम आए

    लघुकथा - जो जिसके काम आए - 
            "जो जिसके काम आए" - 
बात बहुत पुरानी है। एक गांव में भले और मेहनती लोग रहा करते थे। गांव का ठाकुर हुकुम सिंह खूब रसूखदार और बड़ा जमींदार था।
गांव में किसी के कोई काम होता तो वो हमेशा लवाजमे के साथ घोड़े पर सवार हो कर आता, परिवार के सदस्यों को बाहर से ही जोर से पुकारता और कहता कि मेरे लायक कोई काम हो तो ज़रूर बताना।
लोग ठीक है ठाकुर हुकुम कह कर मुजरा करते।
गांव के एक किसान राधे की मां का देहांत हुआ, ठाकुर हुकुम सिंह वही घोड़े पर सवार हो कर आए, वही पहले वाली बात दोहराई।
राधे ने अन्य गांव वालों की तरह जी हुकुम कह कर अर्थी का काम करने लगा।
थोड़े दिन बीते ठाकुर साहब की मां का निधन हो गया।
गांव वालों को यह सूचना मिली तो सब राधे के घर इकट्ठे हुए।
राधे थोड़ा पढ़ा - लिखा किसान था।
उसने गांव के लोगों से कहा, यह ठाकुर साहब हमारे किसी भी काम पर आते हैं, बाहर ड्योढ़ी से ही किसी काम के बारे में पूछ कर चले जाते हैं। इन्हें सबक़ सिखाना चाहिए।
निहंग सिंह ने राधे की हां में हां मिलाते हुए उसका समर्थन किया।
ठाकुर को उसी की भाषा में सबक़ सिखाया जाना चाहिए, पर कैसे ? यह प्रश्न सभी को चिंतित कर रहा था।
कर्माराम ने कहा, क्यों ना हम कहीं से किराए के घोड़े मंगवा कर ठाकुर के घर चलें।
यह सुझाव सब को पसंद आया। 
तुरंत गांव का एक आदमी शहर गया और तीस - चालीस घोड़े ले आया।
गांव के बुजुर्ग और नौजवान घोड़ों पर सवार हो कर पहुंच गए ठाकुर साहब की हवेली पर।
ठाकुर हुकुम!
ठाकुर हुकुम!
ड्योढ़ी पर बैठे ठाकुर साहब लोगों का इंतजार कर रहे थे कि कब वो आएं, अर्थी का काम करें। 
सुबह के समय मां का देहांत हुआ था, शाम होने के करीब है, पर अर्थी नहीं सजी।
हुकुम सिंह ने सभी को आकर जल्दी अर्थी सजाने का काम करने का अनुरोध किया।
राधे, हरनाम, कर्माराम, चेतन, पल्लव, चरण सिंह ने एक साथ जोर से जवाब दिया!
ठाकुर साहब हमारे लायक कोई काम हो तो बताना और पलट कर घोड़ों को मोड़ दिया।
ठाकुर घिघयाने लगा, ऐसा मत करो, मैं अपनी मां की अर्थी अकेले कैसे बनाऊं।
लोगों तपाक से जवाब दिया, ठाकुर साहब आपने जितना किया उतना हमने कर दिया।
आपने कितनों की मां की अर्थी सजाई है जो हम आपकी मां की अर्थी सजाएं।
अब ठाकुर समझ गया, उसने सब से माफी मांगते हुए पछतावा जाहिर किया।
गांव वालों ने ठाकुर को सबक सिखाया।

शिक्षा - हम जिसके जितने काम आते हैं लोग उतना ही हमारे काम आएंगे।
#जिगर_चूरुवी

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