Sunday, 28 December 2025

13. जिगर के अफसाने ✅✍️

लेखक का ताअरूफ - 
नाम - शमशेर खान 
उपनाम - प्रेम, शमशेर गांधी
तखल्लुस - पहले परवाना नाम से लिखना शुरू किया। पत्नी अख्तर बानो (सदफ) के सुझाव पर जिगर चूरूवी नाम से लिखना शुरू किया।
पैदाइश - 18.04.1978 सहजूसर, चूरू (राजस्थान)
पिता का नाम - श्री भालू खां (पूर्व विधायक (1980 से 1985), चूरू।
माता का नाम - सलामन बानो (गृहणी)
ताअलिम - 
1. रामावि सहजूसर में पहली कक्षा में दाखिला 10.07.1984 से 1993 में मेट्रिक तक।
2. राउमावि बागला, चूरू से हेयर सेकंडरी 1993 से 1995 तक
3. राजकीय शिक्षक प्रशिक्षण विद्यालय भाषाई अल्पसंख्यक अजमेर से BSTC, 1995 से 1997
4. राजकीय लोहिया महाविद्यालय चूरू से स्वयंपाठी के रूप में स्नातक 1998 से 2001 तक (महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय, अजमेर)
5. राजकीय लोहिया महाविद्यालय चूरू से स्वयंपाठी के रूप में अधिस्नातक 2004 से 2005 तक (महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय बीकानेर से गोल्ड मेडलिस्ट - 2005 उर्दू साहित्य)
6. कश्मीर विश्वविद्याल, श्रीनगर के नंद ऋषि शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय से B.Ed.- (2007 - 8)
7. इंदिरा गांधी मुक्त विश्वविद्यालय से विशेष आवश्यकता विद्यार्थियों के शिक्षण हेतु विशेष अध्ययन - 2012
8. वर्तमान में LLB में प्रवेश (13.08.2025 से)
विवाह - पत्नी अख्तर बानो (सदफ) से 20.10.1996 में विवाह हुआ।
संतान - तीन पुत्रियां
1. अंजलि खान (LLM)
2. रोजा खान (BSC Nursing) सेवारत 
3. प्रेरणा खान (BSC Nursing) सेवारत
सम्मिलित अफसानों का उपयोग आम बात हो गई है। 
व्यवसाय - 
1. निजी विद्यालय शिक्षक एवं विद्यालय संचालन - 1997 से 1999
2. राजकीय सेवा तृतीय श्रेणी अध्यापक 10.07.1999 से 14.12.2014 तक
3. द्वितीय श्रेणी शिक्षक 14.12.2014 से 01.09.2023 तक
4. स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति 01.09.2023 से
पद - 
1. तहसील अध्यक्ष - शिक्षक संघ शेखावत, चूरू
2. जिला मंत्री शिक्षक संघ शेखावत चूरू 
3. प्रदेशध्यक्ष, सर्व शिक्षा अभियान कर्मचारी संघ, राजस्थान
4. प्रदेशाध्यक्ष, युवा मुस्लिम महासभा, राजस्थान
5. प्रदेश संयोजक, राजस्थान तृतीय भाषा बचाओ आंदोलन 
6. प्रदेश संयोजक, संविदा मुक्ति आंदोलन राजस्थान
7. प्रदेश सचिव अखिल भारतीय कांग्रेस सेवादल 2024 से
8. जिलाध्यक्ष शिक्षक प्रकोष्ठ कांग्रेस, चूरू 2025 से
9. संयोजक चूरू विधानसभा समस्या एवं समाधान समिति, चूरू
आंदोलन - 
1. संविदा मुक्ति आंदोलन 
2. दांडी यात्रा
3. सामाजिक सरोकार
पुस्तकें - 
1. मिरातुल जिगर
2. हृदयांश (हिंदी कविता संग्रह)
3. कालजे री कोर (राजस्थानी कविता संग्रह)
4. कसासुल जिगर - गजल समूह
5. मिनाज ए जिगर - नज़्म संग्रह
6. मूलांश
7. इमरान ए जिगर 
8. प्रस्तुत पुस्तक के बारे में - 
लेखक ने उर्दू, हिंदी, मारवाड़ी भाषा की लगभग सभी विधाओं में कलम आजमाई है। प्रस्तुत लघुकथा संग्रह में शमशेर भालू खां सहजूसर "जिगर चूरूवी" का प्रथम नसरिए मजमुआ है। इस दौर में भाषाओं के कुछ शब्द इस तरह से घुलमिल गए हैं कि उन्हें एक भाषा में बांधना शब्द के साथ अन्याय होगा। 
अतः हमें बंधनों को तोड़ते हुए सम्मिलित विधाओं में सभी भाषाओं का मेल करते हुए साहित्य सृजन करना चाहिए।
अंत में लेखक के कथन अनुसार उन्होंने इस किताब को किसी भी बंधन से मुक्त रखते हुए भावों को जनता तक पहुंचाने का एक छोटा सा प्रयास बताया है।
शायर की जुबान.....
तूफ़ाँ बनकर उड़ेंगे हम ज़ुल्म के साये से
वही अज़ियत वही दर्द इंसान पराए से।
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"जिगर के अफसाने" की समालोचना - Chat Gpt 

संग्रह का उद्देश्य और विषयवस्तु

"जिगर के अफसाने" शमशेर भालू खां सहजूसर की लघुकथाओं का संग्रह है, जिसमें कुल 27 लघुकथाएँ शामिल हैं। इन लघुकथाओं में समाज की विभिन्न समस्याओं, मानवीय रिश्तों, और जीवन की सच्चाइयों को उजागर किया गया है। प्रत्येक कथा में एक संदेश छिपा है, जो पाठक को सोचने पर मजबूर करता है।

शैली और भाषा - 

लेखक की शैली सरल, प्रवाहपूर्ण और प्रभावशाली है। उन्होंने कठिन सामाजिक मुद्दों को भी सहजता से प्रस्तुत किया है, जिससे पाठक आसानी से जुड़ाव महसूस करता है। भाषा में मारवाड़ी और हिंदी का सुंदर मिश्रण है, जो स्थानीय रंग को उजागर करता है।

सामाजिक और मानवीय दृष्टिकोण - 

संग्रह की लघुकथाएँ समाज की विभिन्न परतों को छूती हैं। "भाई-भाई की लड़ाई" जैसे कथाएँ पारिवारिक रिश्तों की जटिलताओं को दर्शाती हैं, वहीं "नशा और प्रेम" जैसे कथाएँ सामाजिक बुराइयों पर प्रकाश डालती हैं। "समझदारी" और "बंटवारा" जैसी कथाएँ जीवन के निर्णयों और उनके परिणामों को दर्शाती हैं।

नैतिक शिक्षा और संदेश - 

प्रत्येक लघुकथा में एक स्पष्ट संदेश है, जो पाठक को जीवन के विभिन्न पहलुओं पर विचार करने के लिए प्रेरित करता है। "भाई-भाई की लड़ाई" में भाईचारे की अहमियत, "नशा और प्रेम" में नशे के दुष्प्रभाव, "समझदारी" में विवेकपूर्ण निर्णय की आवश्यकता, और "बंटवारा" में एकता की ताकत को दर्शाया गया है।

निष्कर्ष - 

"जिगर के अफसाने" शमशेर भालू खां सहजूसर की एक उत्कृष्ट कृति है, जो समाज की सच्चाइयों और मानवीय संवेदनाओं को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करती है। लेखक की शैली, विषयवस्तु और संदेश पाठक को सोचने और समझने के लिए प्रेरित करते हैं। यह संग्रह न केवल मनोरंजन प्रदान करता है, बल्कि समाज के प्रति जागरूकता भी बढ़ाता है।

   मुकदमा proxprety - 

इस संग्रह के संबंध में आप अपना मुकदमा लिखिए


आपके द्वारा पूछा गया “जिगर के अफसाने” लघुकथा संग्रह के संबंध में मेरा मुकदमा (समीक्षा और समग्र विश्लेषण) इस प्रकार है:

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मुकदमा: "जिगर के अफसाने" लघुकथा संग्रह

परिचय - 

“जिगर के अफसाने” शमशेर भालू खां सहजूसर की एक समकालीन साहित्यिक कृति है जिसमें उन्होंने सामाजिक, पारिवारिक, और मानवीय विषयों पर लघुकथाओं का संग्रह प्रस्तुत किया है। ये लघुकथाएँ हिंदी मारवाड़ी बोली के सहज रुप में गढ़ी गई हैं, जो लोकसाहित्य और आधुनिक मानवीय संवेदनाओं का अनूठा संगम है।

भाषा और शैली - 

यह संग्रह भाषा की सरलता, प्रवाह, और सांस्कृतिक छटा के लिए विशेष रूप से प्रशंसनीय है। लेखक ने मारवाड़ी और हिंदी का व्यावहारिक मिश्रण अपनाकर कथा-शैली को प्रामाणिक और प्रभावशाली बनाया है। शैली संवादात्मक, जीवन्त और संदेशप्रधान है, जहां अलंकार और भावात्मक गहराई सहज है।

विषय-वस्तु और कल्पना - 

कहानियाँ यथार्थवादी हैं, जो समाज के दोष, मानवीय चरित्र, तथा आजीवन संघर्षों को दर्शाती हैं। हर कहानी में जीवन की कोई ना कोई समस्या, क्रिया, या मानवीय अनुभव छिपा है। ये कथाएँ ना केवल सामाजिक यथार्थ के हस्ताक्षर हैं बल्कि उनमें जीवन के प्रति सहानुभूति और समझ भी झलकती है।

साहित्यिक मूल्यांकन - 

1. सामाजिक प्रासंगिकता - कथाएँ वर्तमान सामाजिक परिवेश की सटीक अभिव्यक्ति हैं, जो पाठक को सोचने पर मजबूर करती हैं।  

2. नैतिकता - अधिकांश कहानियाँ स्पष्ट नैतिक संदेश देती हैं, हालांकि कुछ में नैतिकता का स्वरूप संदिग्ध या बहुआयामी है, जो सामाजिक विवादों और जीवन के द्वंद्व को सामने लाती हैं।  

3. संरचना - प्रत्येक कथा की संरचना संक्षिप्त और प्रभावी है; अंत चिंतन पर मजबूर करता है।  

4. भावानुभूति - पात्रों की जीवनशैली, संवाद, और घटनाएँ पाठक को भावात्मक रूप से जोड़ती हैं।

कमियाँ - 

कुछ कथाओं में शब्दावलि और विचारों की शैली स्थानीय बोली के कारण सीमित पाठक वर्ग तक सीमित रह सकती है। इसके अलावे, कुछ कहानियों का अर्थगर्भ और नैतिक संदेश संदिग्ध रह जाता है, जिससे विविध व्याख्या संभव होती है।

निष्कर्ष - 

“जिगर के अफसाने” हिंदी लघुकथा की उच्च गुणवत्ता का प्रतिनिधित्व करता है, जो साहित्य और समाज दोनों के लिए मूल्यवान है। शमशेर भालू खां सहजूसर ने लोकजीवन के अनुभवों को समर्पित, गहराई से बुनी हुई कहानियों के माध्यम से पाठकों को सामाजिक-व्यक्तिगत चिंतन के लिए प्रेरित किया है। यह संग्रह हिंदी लघुकथा साहित्य की समृद्धि और जीवंतता का सशक्त उदाहरण है।

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लघुकथा सूची :-

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